मायावती पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली बीजेपी नेता ने माफ़ी मांगी
बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती पर विवादित बयान देने वाली भाजपा विधायक साधना सिंह ने खेद प्रकट किया है.
वहीं बहुजन समाज पार्टी की ओर से विधायक के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज दरवाने के लिए शिकायत भी दी गई है. हालांकि चंदौली पुलिस ने अभी तक एफ़आईआर दर्ज नहीं की है.
साधना सिंह ने एक सभा में विवादित बयान देते हुए कहा था कि ''हमको पूर्व मुख्यमंत्री न तो महिला लगती हैं और न ही पुरुष. इनको अपना सम्मान ही समझ में नहीं आता. एक चीरहरण हुआ था द्रौपदी का, तो उन्होंने दुशासन से बदला लेने की प्रतिज्ञा ली. वो एक स्वाभिमानी महिला थी.''
साधना सिंह ने इनके अलावा भी कई विवादित बोल मायावती के ख़िलाफ़ बोले थे. बयान पर विवाद होने के बाद अब उन्होंने एक बयान जारी कर माफ़ी मांग ली है.
अपने माफ़ीनामे में साधना सिंह ने लिखा है, "मेरी मंशा सिर्फ़ यही थी कि विगत 2 जून 1995 को गेस्ट हाऊस कांड में भाजपा ने जब मायावती जी की मदद की थी उसे सिर्फ़ याद दिलाना था न कि उनका अपमान करना था. यदि मेरे शब्दों से किसी को कष्ट हुआ है तो मैं खेद प्रकट करती हूं."
वहीं भारत के राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी साधना सिंह के बयान का स्वतः संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है.
साधना सिंह के बयान की भर्त्सना करते हुए बहुजन समाज पार्टी के प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया ने कहा, "ये बयान सामंती और मनुवादी सोच का प्रतीक है और दर्शाता है कि भाजपा यूपी में हुए महागठबंधन से किस हद तक डरी हुई है."
वहीं चंदौली के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बीबीसी से कहा, "हमें शिकायत मिली है. हम विधायक के बयान की सीडी मंगवा रहे हैं. यदि कोई अपराध घटित हुआ है तो एफ़आईआर दर्ज की जाएगी. फ़िलहाल हम देख रहे हैं कि बयान में क्या है."
बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चंदौली के बबुरी थाने में एफ़आईआर दर्ज करवाने के लिए प्रदर्शन भी किया है.
हालांकि ये पहली बार नहीं है जब बीजेपी के किसी नेता ने मायावती को लेकर इस तरह के आपत्तिजनक बयान दिए हैं.
इससे पहले जुलाई, 2016 में यूपी में पार्टी के तत्कालीन उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने भी मायावती को 'वेश्या से बदतर चरित्र' वाला नेता बताया था, जिस पर हुए विवाद के बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था.
आज की तारीख में उत्तर प्रदेश की सरकार में दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह मंत्री हैं और दयाशंकर सिंह की भी पार्टी में वापसी हो चुकी है.
वहीं बहुजन समाज पार्टी की ओर से विधायक के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज दरवाने के लिए शिकायत भी दी गई है. हालांकि चंदौली पुलिस ने अभी तक एफ़आईआर दर्ज नहीं की है.
साधना सिंह ने एक सभा में विवादित बयान देते हुए कहा था कि ''हमको पूर्व मुख्यमंत्री न तो महिला लगती हैं और न ही पुरुष. इनको अपना सम्मान ही समझ में नहीं आता. एक चीरहरण हुआ था द्रौपदी का, तो उन्होंने दुशासन से बदला लेने की प्रतिज्ञा ली. वो एक स्वाभिमानी महिला थी.''
साधना सिंह ने इनके अलावा भी कई विवादित बोल मायावती के ख़िलाफ़ बोले थे. बयान पर विवाद होने के बाद अब उन्होंने एक बयान जारी कर माफ़ी मांग ली है.
अपने माफ़ीनामे में साधना सिंह ने लिखा है, "मेरी मंशा सिर्फ़ यही थी कि विगत 2 जून 1995 को गेस्ट हाऊस कांड में भाजपा ने जब मायावती जी की मदद की थी उसे सिर्फ़ याद दिलाना था न कि उनका अपमान करना था. यदि मेरे शब्दों से किसी को कष्ट हुआ है तो मैं खेद प्रकट करती हूं."
वहीं भारत के राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी साधना सिंह के बयान का स्वतः संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है.
साधना सिंह के बयान की भर्त्सना करते हुए बहुजन समाज पार्टी के प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया ने कहा, "ये बयान सामंती और मनुवादी सोच का प्रतीक है और दर्शाता है कि भाजपा यूपी में हुए महागठबंधन से किस हद तक डरी हुई है."
वहीं चंदौली के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बीबीसी से कहा, "हमें शिकायत मिली है. हम विधायक के बयान की सीडी मंगवा रहे हैं. यदि कोई अपराध घटित हुआ है तो एफ़आईआर दर्ज की जाएगी. फ़िलहाल हम देख रहे हैं कि बयान में क्या है."
बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चंदौली के बबुरी थाने में एफ़आईआर दर्ज करवाने के लिए प्रदर्शन भी किया है.
हालांकि ये पहली बार नहीं है जब बीजेपी के किसी नेता ने मायावती को लेकर इस तरह के आपत्तिजनक बयान दिए हैं.
इससे पहले जुलाई, 2016 में यूपी में पार्टी के तत्कालीन उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने भी मायावती को 'वेश्या से बदतर चरित्र' वाला नेता बताया था, जिस पर हुए विवाद के बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था.
आज की तारीख में उत्तर प्रदेश की सरकार में दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह मंत्री हैं और दयाशंकर सिंह की भी पार्टी में वापसी हो चुकी है.
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