घर में ज़्यादा रहते हैं तो ये कई परेशानियों की है जड़
19वीं सदी के स्कॉटिश-अमरीकी जॉन मुइर ने कभी लिखा था, "वनों में आइए क्योंकि आराम यहीं है." वे अमरीकी राष्ट्रीय उद्यानों के एक शुरुआती हिमायती थे. मुइर ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा योसेमाइट और सिएरा नेवादा के राष्ट्रीय उद्यानों की खाक छानते हुए बिताया था. जीवन में स्वास्थ्य लाभ में प्रकृति के योगदान पर अपने विश्वास के बारे में उन्होंने काफी कुछ लिखा था : "हर व्यक्ति को रोटी के साथ-साथ सुंदरता भी चाहिए, खेलने और इबादत के ऐसे स्थान भी चाहिए जहां प्रकृति आपको स्वस्थ रख सके और आपके शरीर के साथ मन को भी ताक़त दे सके." ऐसा लगता है कि मुइर को इसकी असलियत का भान हो गया था : इस बात के प्रमाण बढ़ते जा रहे हैं कि प्रकृति में समय बिताने से हम और अधिक स्वस्थ और सुखी बनते हैं. यह एक कुछ ऐसी बात है जिसे लोग सहज रूप से अनुभव कर लेते हैं. लेकिन हम प्रौद्योगिकी से भटके हुए अपने काम में व्यस्त हैं और प्राकृतिक वातावरणों से दूर अक्सर शहरी माहौल में रहते हैं. हम बहुत ज़्यादा घर से बाहर भी नहीं निकलते हैं : उदाहरण के लिए एक औसत अमरीकी अपने जीवन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा बंद द...